चाईबासा लाठीचार्ज मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग, राज्यसभा में बोले सांसद आदित्य साहू
रांची/नई दिल्ली: चाईबासा में आदिवासी समुदाय पर हुए कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस की कार्रवाई को लेकर राजनीति गर्मा गई है। भाजपा प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने गुरुवार को राज्यसभा के शून्यकाल में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाते हुए घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
सांसद साहू ने कहा कि 27 अक्टूबर को चाईबासा के पोखरिया टाटा बायपास रोड पर आदिवासी समुदाय के लोग दिन में भारी ओवरलोडेड वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। पिछले दो वर्षों में इस मार्ग पर लगभग 200 लोगों की मौत भारी वाहनों की चपेट में आने से हो चुकी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों की समस्या सुनने के बजाय न तो विधायक और न ही राज्य के परिवहन मंत्री उनसे मिलने पहुंचे। इसके बाद रात में अचानक प्रशासन ने धरनास्थल पर लाठीचार्ज करवाया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे दर्जनों लोग घायल हुए।
साहू ने कहा कि घटना के बाद प्रशासन ने 75 लोगों पर केस दर्ज, 17 लोगों को गिरफ्तार और 500 से अधिक अज्ञात लोगों पर FIR कर दी, जो स्पष्ट रूप से दमनकारी कार्रवाई है।
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के साथ दुर्व्यवहार का भी आरोप
सांसद साहू ने राज्यसभा में यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, जो कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त हैं, जब उपायुक्त को ज्ञापन सौंपने पहुंचे तो उनके साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्मनाक और आदिवासी समुदाय का अपमान है।
“सरकार आदिवासी हितैषी होने का दावा करती है, लेकिन कार्रवाई उसके उलट” — साहू
साहू ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि झामुमो-कांग्रेस गठबंधन आदिवासियों को प्रताड़ित कर रहा है और यह पूरी घटना राज्य के माथे पर कलंक है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के बढ़े हुए मनोबल के पीछे राजनीतिक संरक्षण साफ दिखाई देता है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
सांसद साहू ने केंद्र सरकार और सदन से आग्रह किया कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।
