बंगाल में मतदाता सूची के विशेष परीक्षण पर सियासत गरमाई, टीएमसी ने भाजपा पर लगाया साजिश का आरोप

बंगाल में मतदाता सूची के विशेष परीक्षण पर सियासत गरमाई, टीएमसी ने भाजपा पर लगाया साजिश का आरोप

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन परीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की केंद्रीय निर्वाचन आयोग द्वारा घोषणा के बाद राज्य की सियासत में गर्मी बढ़ गई है।
सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे “भाजपा की साजिश” करार दिया है।

टीएमसी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर राज्य के कई अल्पसंख्यक और ग्रामीण इलाकों के मतदाताओं के नाम काटने की कोशिश की जा रही है।
टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, चुनाव आयोग को निष्पक्ष रहना चाहिए, लेकिन ऐसा लग रहा है कि यह निर्णय भाजपा के दबाव में लिया गया है।

भाजपा ने आरोपों को किया खारिज

वहीं भाजपा ने टीएमसी के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण एक नियमित प्रक्रिया है।
राज्य भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा, “टीएमसी को डर है कि फर्जी मतदाताओं के नाम हटने से उनकी वोट बैंक राजनीति प्रभावित होगी।

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस विशेष प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने और सुधार का कार्य किया जाएगा।
यह अभियान 5 नवंबर से 20 दिसंबर 2025 तक चलेगा और अंतिम मतदाता सूची जनवरी 2026 में प्रकाशित की जाएगी।

विशेष गहन परीक्षण की यह कवायद ऐसे समय में हो रही है जब बंगाल में 2026 विधानसभा चुनावों की राजनीतिक सरगर्मी पहले ही शुरू हो चुकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आयोग की यह पहल पारदर्शिता बढ़ाने के लिए है, लेकिन इसका राजनीतिक असर भी गहरा हो सकता है।

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