विश्व आर्थिक मंच में झारखण्ड की भागीदारी महज संवाद नहीं, देश के लिए टर्निंग प्वाइंट का संकेत
झारखण्ड भारत समेत विश्व के विकास की अगली कहानी को आकार देने के लिए तैयार
झारखण्ड जैसे संसाधन-समृद्ध राज्य के लिए विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) में भागीदारी केवल वैश्विक संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण टर्निंग प्वाइंट का संकेत है। खनिज संसाधनों से भरपूर राज्यों में झारखण्ड अग्रणी स्थान रखता है। यहां कोयला, लौह अयस्क, तांबा, यूरेनियम और अन्य क्रिटिकल मिनरल्स के व्यापक भंडार मौजूद हैं, जो भारत के औद्योगिक, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे को मजबूती प्रदान करते हैं।
समृद्ध पारिस्थितिक तंत्र और आदिवासी बहुल समाज के कारण सतत एवं समावेशी विकास झारखण्ड की विकास यात्रा का मूल आधार रहा है। ऐसे में दावोस में झारखण्ड की उपस्थिति केवल औपचारिक भागीदारी नहीं, बल्कि वह मंच है जहां निवेश की संभावनाएं आकार लेती हैं, रणनीतिक साझेदारियां बनती हैं और विकास, स्थिरता एवं लचीलेपन से जुड़े दीर्घकालिक आर्थिक दृष्टिकोण तय होते हैं।
आज के तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में, जब भारत स्वयं को मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है, झारखण्ड के खनिज संसाधन, भूमि, मानव संसाधन और औद्योगिक आधार इसे राष्ट्रीय विकास में अग्रणी योगदान देने वाला राज्य बनाते हैं।


