ऊर्जा सुरक्षा, मजबूत सप्लाई चेन और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच झारखंड ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026, दावोस में अपनी रणनीतिक क्षमताओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड के राज्य प्रतिनिधिमंडल ने क्रिटिकल मिनरल्स पर एक उच्चस्तरीय वैश्विक संवाद का आयोजन किया, जिसमें भारत, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी और दावोस से जुड़े नीति-निर्माता, उद्योग प्रतिनिधि, शिक्षाविद और वैश्विक विशेषज्ञ शामिल हुए।
इस ग्लोबल हाइब्रिड राउंड टेबल में “भूविज्ञान से मूल्य सृजन तक: झारखंड के क्रिटिकल मिनरल्स के अवसर” विषय पर चर्चा हुई। इसमें यह तथ्य रेखांकित किया गया कि भारत सरकार द्वारा चिन्हित 24 क्रिटिकल मिनरल्स में से 20 झारखंड में पाए जाते हैं। यह झारखंड को भारत की ऊर्जा सुरक्षा, जियो-सिक्योरिटी और जियो-इकोनॉमिक रणनीति का एक अहम स्तंभ बनाता है। प्रतिभागियों ने स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और भविष्य की तकनीकों में झारखंड की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि झारखंड केवल खनन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अनुसंधान एवं विकास, मिनरल प्रोसेसिंग, उन्नत विनिर्माण और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में राज्य सरकार एक व्यापक मिनरल प्रोसेसिंग नीति का मसौदा तैयार कर रही है, जिसमें निवेश प्रोत्साहन, वित्तीय सहयोग और मूल्य श्रृंखला विकास पर विशेष जोर दिया गया है। यह नीति यूके–भारत एफटीए, भारत–जर्मनी सहयोग और यूके–भारत व्यापार एवं सुरक्षा जैसे अंतरराष्ट्रीय ढाँचों के अनुरूप है।
चर्चा के दौरान जिम्मेदार खनन, सतत आपूर्ति श्रृंखलाओं और तकनीक आधारित मूल्य संवर्धन की आवश्यकता पर सहमति बनी। झारखंड की “प्रकृति के साथ विकास” की विकास दृष्टि ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को विशेष रूप से प्रभावित किया। इस अवसर पर “Beneath the Ground: Powering India’s Energy Security” शीर्षक से एक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया, जो झारखंड की भूवैज्ञानिक समृद्धि और भारत की ऊर्जा सुरक्षा में उसकी भूमिका को दर्शाती है।
केंद्र सरकार में पूर्व राज्य मंत्री, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, वैश्विक शोध संस्थान और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि झारखंड वैश्विक मंच पर दीर्घकालिक और दूरदर्शी साझेदारी के लिए पूरी तरह तैयार है। राज्य स्थापना के 25 वर्षों के बाद झारखंड अब खनिज-समृद्ध राज्य से आगे बढ़कर प्रोसेसिंग, विनिर्माण और स्वच्छ औद्योगिक विकास के वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।

