विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक में झारखण्ड पहली बार होगा शामिल
दावोस में “प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण विकास” को रखेगा झारखण्ड आधार
रांची | 10 जनवरी 2026
विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की वार्षिक बैठक में इस वर्ष भारत के दस राज्य भाग लेंगे। 19 से 23 जनवरी 2026 तक स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित होने वाली इस प्रतिष्ठित बैठक में झारखण्ड पहली बार भागीदारी कर रहा है, जो राज्य के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
इस बैठक में केंद्रीय मंत्रियों के साथ एक उच्चस्तरीय राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होगा। झारखण्ड के अलावा महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, असम, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश और केरल इस मंच पर अपनी भागीदारी दर्ज कराएंगे। कई राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री वैश्विक आर्थिक और नीतिगत संवादों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
25 वर्ष पूरे होने पर झारखण्ड की वैश्विक दस्तक
राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर झारखण्ड की यह यात्रा खास मानी जा रही है। झारखण्ड के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन करेंगे।
दावोस में झारखण्ड की उपस्थिति शासन-आधारित विकास, सततता और दीर्घकालिक संस्थागत क्षमता को दर्शाएगी। यह भागीदारी राज्य की पहचान को केवल चर्चा का विषय बनने से आगे बढ़ाकर, वैश्विक विकास संवादों को आकार देने वाले सक्रिय भागीदार के रूप में स्थापित करती है।
झारखण्ड अपने विषय “प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण विकास” के माध्यम से यह संदेश देगा कि आर्थिक प्रगति सामाजिक समानता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ संभव है।
इन प्रमुख विषयों पर होगा फोकस
विश्व आर्थिक मंच में झारखण्ड की भागीदारी निम्नलिखित क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगी—
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी
ऊर्जा सुरक्षा एवं नवीकरणीय ऊर्जा
पर्यावरण, वन एवं जैव-अर्थव्यवस्था
महिला सशक्तिकरण
क्रिटिकल मिनरल्स
विनिर्माण एवं खाद्य प्रसंस्करण
पर्यटन एवं स्वास्थ्य सेवा
इसके साथ ही झारखण्ड विषयगत सत्रों और द्विपक्षीय बैठकों के माध्यम से अपने दीर्घकालिक, न्यायसंगत और समावेशी विकास दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा।
वैश्विक साझेदारियों को मिलेगा नया बल
इन बैठकों का उद्देश्य बहुपक्षीय संस्थानों, विभिन्न सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों और निजी क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों के साथ सहयोग और साझेदारी को मजबूत करना है।
दावोस में झारखण्ड की उपस्थिति राज्य की उभरती वैश्विक भूमिका और सतत विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से दर्शाएगी।

