बीजेपी नेता अर्जुन मुंडा ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, पेसा नियमावली को लेकर सरकार पर उठाए सवाल
रांची —
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने शनिवार को रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में झारखंड सरकार द्वारा बनाई गई पेसा अधिनियम से संबंधित नियमावली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
अर्जुन मुंडा ने कहा कि वे एक अत्यंत गंभीर और महत्वपूर्ण विषय पर अपनी बात रखना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार द्वारा पेसा अधिनियम के तहत बनाए गए नियम इस कानून की मूल भावना के विरुद्ध हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में जब वे केंद्र सरकार में जनजातीय मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब संविधान के अनुच्छेद 244 के तहत पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में पेसा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई थी। पेसा अधिनियम का मूल उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा को सशक्त करना था।
अर्जुन मुंडा ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में कई बार झारखंड सरकार को पत्र भेजे गए, लेकिन लंबे समय तक पेसा अधिनियम को लागू नहीं किया गया। अब जब नियमावली बनाई गई है, तो उसमें ग्राम सभा के अधिकारों को कमजोर कर दिया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने पेसा अधिनियम 1996 की आत्मा को समाप्त कर दिया है। यह नियमावली आदिवासी स्वशासन को मजबूत करने के बजाय मात्र एक औपचारिकता बनकर रह गई है, जो भविष्य में कई समस्याओं को जन्म दे सकती है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में सरकार को अत्यंत संवेदनशील होकर काम करना चाहिए, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार आदिवासियों के हितों की अनदेखी कर रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अर्जुन मुंडा ने सरकार से पेसा अधिनियम की नियमावली पर पुनर्विचार करने और ग्राम सभा को उसके वास्तविक अधिकार देने की मांग की।


