बिहार में सियासी उलटफेर की चर्चाएं इन दिनों जोरो पर है। एक तरफ जदयू के अध्यक्ष ललन सिंह के इस्तीफे तो दूसरी ओर ये भी चर्चा है कि आरजेडी अपनी सियासी जमीन और मजबूत करने में जुट गई है। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर दिनभर चर्चाएं होती रही, कभी ललन सिंह के इस्तीफे की खबर आई तो कभी इस खबर का खंडन भी हुआ। वैसे नीतीश कुमार को तय करना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अध्यक्ष पद की जिम्मेवारी ले सकते हैं। दूसरी ओर एक ऐसा नाम है जिसे विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है। ये नाम है रामनाथ ठाकुर का जो फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं ।माना यह जा रहा है कि नीतीश कुमार यह निर्णय लेकर आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग यानी एबीसी में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहेंगे। जेपी के सच्चे शिष्य रहे स्व कर्पूरी ठाकुर आज भी बिहार में समाजवाद के प्रतीक के रूप में देखे जाते हैं। रामनाथ ठाकुर कर्पूरी ठाकुर के ज्येष्ठ बेटे हैं। 2024 में कर्पूरी ठाकुर का शताब्दी वर्ष जदयू मनाने जा रही है। पार्टी का ऐसा मानना है नीतीश कुमार
रामनाथ ठाकुर को पार्टी अध्यक्ष बनाकर सम्मान देना चाहते है।वैसे मुंगेर से सांसद ललन सिंह नीतीश कुमार के काफी करीबी हैं वावजूद इनसे पार्टी की कमान अब इनके हाथों से लिए जा सकते है। दरअसल ये भी बताया जा रहा है कि ललन सिंह की लालू यादव और तेजस्वी यादव से बढ़ती नजदीकी से पार्टी के आरजेडी में विलय को लेकर अटकलें लग रही है और इससे जदयू को नुकसान हो रहा है। इससे पहले ठीक ऐसे ही आरोप जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह पर भी लगा था। बताया जाता है की उन्हें जुलाई 2021 में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इसलिए हटाया गया था क्योंकि यह चर्चाएं हो रही थी की उनकी निकटता बीजेपी से बढ़ गई है। बहरहाल पार्टी दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारी समिति और राष्ट्रीय परिषद की बैठक बुलाई है। 29 दिसंबर को होने वाली इस बैठक में राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की जगह राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए किसी और नेता का चुनाव होना है। इसी कड़ी में अब रालोजद प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने एक बड़ा बयान दिया है। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि आरजेडी के साथ जाना नीतीश कुमार का आत्मघाती कदम था। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि आज जदयू कहीं का नहीं है। नीतीश जी की साख मिट्टी में मिल चुकी है।उपेंद्र कुशवाहा के मुताबिक राजनीतिक गलियारों में जदयू और राजद के बीच खटास की भी चर्चा होने लगी है। और जो कहा था वही सच साबित हो रहा है। वहीं आरजेडी के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद विश्व मोहन कुमार का कहना है कि आरजेडी में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव है। पूर्व सांसद विश्व मोहन कुमार ने कहा कि युवा नेतृत्व की जो छवि लेकर तेजस्वी यादव ने लोगों में एक उम्मीद जगाई थी वह विलुप्त हो चुकी है। खासकर जदयू से जुड़ने के बाद पार्टी की धार कुंद हो गई है।पार्टी के अंदर कुछ ऐसे नेता हैं जो संगठन को जागीर समझते हैं। ऐसे लोग किसी अन्य को उभरने नहीं दे रहे हैं। इसका सीधा असर पार्टी के संगठन पर पड़ रहा है। इसके कारण पार्टी का न सिर्फ संगठन कमजोर हुआ है बल्कि पार्टी मतदाताओं का विश्वास भी खोती जा रही है। पार्टी संगठन पर कब्जा जमाए नेताओं ने संगठन को गिरवी रख दिया है। इससे कार्यकर्ता स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा हुआ है।
गठबंधन में कुछ नेताओं ने लोकतंत्र को राजतंत्र के समक्ष लाकर खड़ा कर दिया है।
बिहार में सियासी उलटफेर की अटकलें….
