करीब डेढ़ साल के राजनीतिक संकट और उथल-पुथल के बाद बांग्लादेश में आज आम चुनाव कराए जा रहे हैं। यह चुनाव ऐसे माहौल में हो रहा है जब देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा हुआ है, कई इलाकों में धार्मिक हिंसा की घटनाएं सामने आ चुकी हैं और चुनाव की निष्पक्षता को लेकर देश-विदेश में गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के चुनावी प्रक्रिया से बाहर रहने के कारण राजनीतिक संतुलन बिगड़ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि मुख्य विपक्षी दल के बिना चुनाव होने से लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ती है और चुनाव की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।
चुनाव से पहले अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले और धार्मिक तनाव की खबरों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। कई मानवाधिकार संगठनों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। प्रशासन ने दावा किया है कि संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं।
बांग्लादेश चुनाव आयोग का कहना है कि मतदान पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। वहीं विपक्षी समूहों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का आरोप है कि राजनीतिक प्रतिबंधों और दमन के माहौल में स्वतंत्र चुनाव संभव नहीं है।
इन तमाम विवादों और चुनौतियों के बीच आज का चुनाव बांग्लादेश की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मतदान के नतीजे देश में स्थिरता लाते हैं या राजनीतिक तनाव को और बढ़ाते हैं।


