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एयरटेल के ग्राहक 10 जनवरी से पहले कर ले ये काम, नहीं तो हो सकती है दिक्कत

नई दिल्ली : केन्द्र सरकार ने भारती एयरटेल को कुछ कड़ी शर्तों के साथ अपने मोबाइल कस्टमर्स का ई-केवाईसी सत्यापन करने की इजाजत दे दी है। हालांकि एयरटेल को यह करने के लिए सिर्फ 10 जनवरी तक का समय दिया गया है। लिहाजा इस फैसले से वह एयरटेल ग्राहक जिन्होंने अभी तक अपने मोबाईल को आधार के तहत रजिस्टर नहीं किया है वह 10 जनवरी तक इस काम को पूरा करा सकते हैं।

हालांकि, सरकार ने एयरटेल पेमेंट्स बैंक के बारे में एयरटेल ई-केवाईसी निलंबन के आदेश को कायम रखा है। मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि देश की सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी एयरटेल को यूआईडीएआई से यह छूट कुछ शर्तों के साथ दी गई है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट द्वारा मोबाइल नबंर को आधार से जोड़ने की अंतिम तारीख 31 मार्च नजदीक है और बड़ी संख्या में एयरटेल ग्राहकों के सिमकार्ड का आधार सत्यापन पूरा नहीं हो सका है।

लिहाजा, 10 जनवरी तक एयरटेल को आधार ई-केवाईसी के जरिए अपने सिमकार्ड सत्यापन का काम करने की छूट का सीधा फायदा एयरटेल उपभोक्ता उठा सकते हैं। गौरतलब है कि यूआईडी अथॉरिटी एयरटेल के मुद्दे पर अपनी अंतिम राय 10 जनवरी के बाद पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद बनाएगा। गौरतलब है कि यूआईडी अथॉरिटी ने केन्द्रीय रिजर्व बैंक और टेलिकॉम मंत्रालय से भारती एयरटेल की प्रणाली, प्रक्रियाओं, एप्लिकेशंस, दस्तावेजीकरण का ऑडिट करने को कहा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कंपनी अपनी लाइसेंस शर्तों का अनुपालन कर रही है।

सितंबर में एयरटेल के खिलाफ शिकायत मिलने पर यूआईडी अथॉरिटी ने कंपनी को नोटिस भेजते हुए पूछा ता कि क्यों वह अपने ग्राहकों का पेमेंट बैंक खाता खोलने के लिए ग्राहकों की मंजूरी नहीं ले रहा है। एयरटेल पर आरोप लगा था कि वह केन्द्र सरकार द्वारा सब्सिडी के डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर फंड को बिना ग्राहकों की जानकारी के उनके पेमेंट बैंक खाते में ट्रांसफर कर रहा है।

इस आरोप को सही पाए जाने पर केन्द्र सरकार ने पिछले हफ्ते एयरटेल और उसके पेमेंट बैंक को आधार के जरिए ग्राइकों की ई-केवाईसी अधिकार छीन लिया था। हालांकि सरकार के इस कदम के बाद एयरटेल ने अपनी गलती को सुधारते हुए ग्राहकों को सरकारी सब्सिडी से मिले लगभग 138 करोड़ रुपयों को पेमेंट बैंक खातों से निकालकर अपने 55.6 लाख ग्राहकों के मूल खातों में ट्रांसफर कर दिया। इसके साथ ही एयरटेल ने 2.5 करोड़ रुपये का जुर्माना भी यूआईडी अथॉरिटी को जमा करा दिया जिसके बाद उसे यह रियायत दी गई है।

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