आईईडी विस्फोट में घायल साहू बरजो को अब घर चलाना बन गया है चुनौती
झारखंड पश्चिमी सिंहभूम
नक्सल हिंसा की चपेट में एक और मासूम जिंदगी तबाह हो गई।
पश्चिमी सिंहभूम जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले साहू बरजो हर दिन की तरह जंगल में पत्ते चुनने और लकड़ी बटोरने गए थे। यह उनका रोज़ का काम था — जिससे वो अपने परिवार का पेट पालते थे। लेकिन उसी जंगल में नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए आईईडी बम बिछा रखा था।
साहू बरजो अनजाने में उस बम की चपेट में आ गए।
विस्फोट इतना भीषण था कि उनका एक पैर काटना पड़ा। अब वह चल नहीं सकते। एक मेहनती आदिवासी, जो रोज़ मजदूरी कर अपने परिवार को पालता था, अब विकलांग हो चुका है।
उनका जीवन पहले जैसा नहीं रहा।
मिट्टी का घर, टूटी हुई दीवारें और सीमित साधनों के बीच उनकी पत्नी दिन-रात सेवा में लगी है। लेकिन परिवार का पेट भरना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
साहू बरजो की आंखों में सवाल है और उनकी पत्नी की आंखों में चिंता — “अब घर कैसे चलेगा?

